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Friday, January 20, 2017

मंतव्य ( जनतांत्रिक रचनाशीलता की समग्र प्रस्तुति)

आदरणीय/ आदरणीया
जय भीम!
दलित साहित्य आज भारतीय साहित्य की मुख्य धारा बन चुका है। अपने सरोकार, संवेदना और सपनों के दम पर। यही साहित्य की वह धारा है, जो यथास्थितिवादी साहित्य से विद्रोह करती हुई ज्वालामुखी की तरह प्रकट हुई और इसने भारतीय रचना जगत को नीम बेहोशी से झकझोरते हुए जगाया। इसने भारतीय समाज की उन बजबजाती हुई, सड़ती हुई परंपराओं, रूढ़ियों के ऊपर से उस पर्दे को नोच फेंका जिसे डालकर पारंपरिक साहित्य काल्पनिक विमर्शों का रसास्वादन कर रहा था। साहित्य की यह नयी धारा अपने साथ ऐसी सच्चाइयों और सवालों को लेकर प्रकट हुई जिसके बारे में अब तक सोचने-विचारने की जहमत किसी ने उठाई ही नहीं क्योंकि यह अत्यंत असुविधाजनक और दुस्साहसिक भी था। दलित साहित्य अपने साथ सामाजिक न्याय का मुक्ति संघर्ष लिए हुए प्रकट हुआ, इसने हाशिये पर डाल दिये गये लोगों की पीड़ा, वेदना और छटपटाहट को रेखांकित करते हुए साहित्य के पारंपरिक मानकों को चुनौती देना शुरू किया और भारतीय साहित्य के आचार्य कराह उठे। सही मायने में यह जमीन से जुड़ा साहित्य था, इसके रचनाकार समाज की तलछट से उठकर आये थे और इनके अनुभव 'महौपन्यासिक' थे। दलित साहित्य के माध्यम से जो आत्मकथाएं आयीं, उन्होंने भारतीय उपन्यासों के रंग फीके कर दिये। दलित साहित्य ने अपने शिल्प और संवेदना के स्तर पर अपने आयामों का लगातार विस्तार किया है। यह जानना दिलचस्प होगा कि नयी सदी में यह साहित्य क्या रूप ले रहा है, आगे इसकी क्या चुनौतियाँ हैं, नये रचनाकार किन सपनों के साथ आगे बढ़ रहे हैं, उनके सामने किस तरह के संघर्ष हैं क्योंकि समय के साथ समाज भी बदल रहा है। इन्हीं चिंताओं को लेकर मंतव्य पत्रिका का अगला अंक दलित साहित्य विशेषांक होगा, जिसमें हम हिंदी के अलावा दूसरी भारतीय भाषाओं के लेखकों को भी शामिल करेंगे। इस अंक के अतिथि संपादक होंगे युवा कथाकार Suraj Badtiya . उनका मोबाइल नंबर-09891438166, ईमेल- badtiya.suraj@gmail.com रचनाकार मित्र इस योजना संबंधी अपने परामर्श उन्हें सीधे दे सकते हैं। उम्मीद है, मित्रों का सहयोग हमेशा की तरह बना रहेगा। धन्यवाद।
सादर
हरे प्रकाश
हरे प्रकाश उपाध्याय
संपादक
मंतव्य ( जनतांत्रिक रचनाशीलता की समग्र प्रस्तुति)
204, सनशाइन अपार्टमेंट, बी-3, बी-4, कृष्णा नगर, लखनऊ-226012

Monday, December 26, 2016

पुन: आग्रह : मंतव्य पत्रिका, दलित साहित्य पे केन्द्रित

पुन: आग्रह
मंतव्य पत्रिका, दलित साहित्य पे केन्द्रित
लेख, कहानी ,उपन्यास अंश , आत्मकथांश ,कविता ,अनुभव ,संस्मरण , समीक्षा , यात्रा वृत्तांत मुलाकाते , प्रेम अभिव्यक्ति , व्यंग्य , लघुकथा और सपनों का सुखान्त-दुखांत विमर्श इत्यादि सिर्फ हिंदी ही नहीं अन्य भारतीय भाषाओं का भी दलित साहित्य शामिल हो संवाद करेगा
अतिथि संपादक - सूरज बडत्या ( suraj badtiya )
दिनांक - 3 जनवरी तक , badtiya.suraj@gmail.com पर भेजे
अधिक जानकारी - 09891438166

Tuesday, December 13, 2016

National Seminar Info.

आप सादर आमंत्रित है....

धन्यवाद

Monday, November 28, 2016

CSIJ Publication Notification

Creative Space : International Journal
(Refereed & Peer-Reviewed Intrnational Journal)
Multi-Lingual and Multi-Disciplinary
ISSN 2347-1689
Impact Factor : 0.339

Vol. 04, Issue 04, July to Aug., 2016

Please send Your Research Article for This Issue 

जल्द ही यह अंक आपके सामने होगा.
|| धन्यवाद ||

Editor : Dr. Haresh Parmar (9408110030)

Seminar

Dear Sir / Madam, 

Please find the attachment or go through the link 


Please circulate this invitation to your friends and other researchers

With warm regards 
Prof. Vilas Adhav (9850910917)
 Professor
Dr. P. V. Gupta (9823255448)
Assistant Professor 
Seminar Coordinators
Office No. 020-2560127

Thursday, November 3, 2016

Creative Space : International Journal Vol 4 Issue 3 June, 2016

Creative Space : International Journal
(Refereed & Peer-Reviewed Intrnational Journal)
Multi-Lingual and Multi-Disciplinary
ISSN 2347-1689
Impact Factor : 0.339

Vol. 04, Issue 03, May to Jun, 2016

Index 



Please See and Read Full Issue
Download Link 

Please send Your Article and Literature for Next Issue

Thanks

 Creative Space New Issue


Tuesday, November 1, 2016

A Gentle Reminder about the International Conference

Dear Sir / Madam,
Kindly ignore this mail if you have already responded to this Conference.
This is to remind you that the deadline for the paper submission for the International conference on "English Language, Literature & Communication: Innovations & Applications in the Teaching - Learning Scenario" is on 30th of November. Please send your papers before the deadline.

I request your wholehearted support by participating in this conference and also by encouraging more people to participate.
Looking forward to your response
Warm Regards,

Prof.(Dr.)Omana Antony 
Dean, School of Humanities
K.R.Mangalam University, Gurgaon